Snakes in Jharkhand: Why 95% Are Harmless (And Which 5% You Must Avoid!)

Snakes of Jharkhand: Why 95% Are Harmless, Identification Guide, Snakebite Management & JPSC/JSSC Complete Master Study Notes

📌 JPSC & JSSC Exam Comprehensive Guide (झारखंड की सरीसृप विविधता, पारिस्थितिकी व स्वास्थ्य प्रबंधन):

“यह मास्टर स्टडी नोट JPSC Civil Services (Paper I – Environmental Science, Biodiversity & Disaster Management, Paper II – Wildlife Heritage of Jharkhand) तथा JSSC CGL/SI परीक्षाओं हेतु विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें झारखंड के छोटानागपुर पठार व संताल परगना में पाई जाने वाली सर्प प्रजातियों, विषहीन बनाम विषैले सर्पों के भौतिक लक्षणों, ‘बिग फोर’ (Big Four Venomous Snakes) की जैविक संरचना, एण्टी-स्नेक वेनम (ASV) प्रोटोकॉल, राष्ट्रीय सर्पदंश रोकथाम योजना (NAP-SE) तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की प्रासंगिक धाराओं का गहन व प्रामाणिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।”

1. Ecological Overview & Biodiversity of Herpetofauna in Jharkhand (झारखंड की सरीसृप विविधता एवं पारिस्थितिकी)

झारखंड राज्य का भौगोलिक विस्तार मुख्य रूप से छोटानागपुर पठार, राजमहल की पहाड़ियों एवं संताल परगना के जंगलों में फैला हुआ है। यहां की उष्णकटिबंधीय शुष्क व आर्द्र पर्णपाती वन (Tropical Dry & Moist Deciduous Forests), गुफाएं, नदी घाटियां तथा चट्टानी क्षेत्र सरीसृपों (Herpetofauna) हेतु एक समृद्ध प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं।

  • प्रजातियों की विविधता: झारखंड में सर्पों की 35 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं जो मुख्य रूप से 7 भाषावैज्ञानिक व जैविक कुलों (Families) से संबंधित हैं—Colubridae, Elapidae, Viperidae, Pythonidae, Boidae, Natricidae एवं Typhlopidae
  • 95% विषहीन होने का वैज्ञानिक तथ्य: कुल पाई जाने वाली 35 से अधिक प्रजातियों में से केवल 4 से 5 प्रजातियां (नाग, करैत, रसेल्स वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर व पिट वाइपर) ही मनुष्य हेतु घातक विष धारण करती हैं। शेष 95% से अधिक प्रजातियां पूरी तरह विषहीन (Non-Venomous) या अत्यधिक मृदु-विषैली (Mildly Opisthoglyphous) होती हैं, जिनके काटने से मानव जीवन को कोई खतरा नहीं होता।
  • कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में मित्रवत भूमिका (Biological Pest Control):
    • झारखंड एक कृषि-प्रधान राज्य है जहां धान, मक्का व दलहन की खेती मुख्य रूप से होती है। खेत-खलिहानों में चूहे (Rattus rattus, Bandicota bengalensis) फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
    • एक वयस्क धामन (Indian Rat Snake) या पानी सांप (Keelback) प्रतिवर्ष औसतन 150 से 200 चूहों को खाकर समाप्त करता है। इस प्रकार ये सांप प्राकृतिक ‘बायोलॉजिकल पेस्ट कंट्रोलर’ के रूप में किसानों की करोड़ों रुपये की फसल बचाते हैं।
  • पर्यावरण खाद्य श्रृंखला में स्थान: सांप पारिस्थितिकी तंत्र में द्वितीयक व तृतीयक उपभोक्ता (Secondary & Tertiary Consumers) होते हैं। ये चूहों व कीटों की आबादी नियंत्रित करते हैं तथा स्वयं मोर, बाज, चील व नेवले का भोजन बनकर खाद्य जाल (Food Web) का संतुलन बनाए रखते हैं।

2. Detailed Identification Guide: Non-Venomous vs Venomous Snakes (शारीरिक पहचान मार्गदर्शन)

सांपों की पहचान हेतु केवल उनके रंग पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। वैज्ञानिक वर्गीकरण एवं भौतिक लक्षणों के आधार पर विषहीन और विषैले सांपों को निम्नलिखित मापदंडों द्वारा पहचाना जाता है:

  • 1. सिर का आकार (Head Shape):
    • विषैले सांप (Vipers): वाइपर प्रजाति के विषैले सांपों का सिर गर्दन की तुलना में काफी चौड़ा और त्रिकोणात्मक (Triangular Head) होता है, क्योंकि सिर के दोनों किनारों पर विष ग्रंथियां (Venom Glands) स्थित होती हैं।
    • विषहीन व इलापिड सांप: अधिकांश विषहीन सांपों (धामन, डुंडू) का सिर अंडाकार (Oval/Rounded) तथा गर्दन से सुचारू रूप से जुड़ा होता है। (अपवाद: कोबरा का सिर शांत रहने पर अंडाकार होता है, परंतु सतर्क होने पर वह फन फैलाता है)।
  • 2. आंख की पुतली (Eye Pupil Shape):
    • विषैले वाइपर: वाइपर सांपों की पुतली बिल्ली की आंख की भांति लंबवत/खड़ी (Vertical Slit Pupil) होती है।
    • विषहीन एवं इलापिड सांप: कोबरा, करैत तथा अधिकांश विषहीन सांपों की पुतलियां गोल (Round Pupil) होती हैं।
  • 3. दंत संरचना व विष दंत (Dentition & Fang Morphology):
    • एग्लाइफस (Aglyphous): कोई विष दंत नहीं। दांत छोटे, ठोस व समान आकार के होते हैं (उदा. धामन, अजगर, डुंडू)।
    • प्रोटेरोग्लाइफस (Proteroglyphous): ऊपरी जबड़े के अगले हिस्से में स्थिर, छोटे खोखले विष दंत (Fixed Front Fangs) (उदा. नाग, करैत – Elapidae)।
    • सोलेनोग्लाइफस (Solenoglyphous): ऊपरी जबड़े में मुड़ने वाले, लंबे, खोखले विष दंत जो शिकार करते समय बाहर निकलते हैं (Retractable Hinged Fangs) (उदा. रसेल्स वाइपर, पिट वाइपर – Viperidae)।
    • ओपिस्थोग्लाइफस (Opisthoglyphous): जबड़े के पिछले हिस्से में स्थित विष दंत (Rear Fanged)। इनका विष मनुष्यों हेतु हानिकारक नहीं होता (उदा. बिल्ली सांप/Cat Snake)।
  • 4. पूंछ एवं लकीरों का वर्गीकरण (Subcaudal Scales & Tail Structure):
    • विषैले सर्पों की पूंछ के निचले हिस्से के शल्क (Subcaudal Scales) प्रायः एकल पंक्ति में होते हैं, जबकि विषहीन सर्पों में ये विभाजित (Double row) होते हैं।

3. Deep-Dive into The ‘Big Four’ Venomous Snakes of Jharkhand (विषैले ‘बिग फोर’ सांपों का वैज्ञानिक विवरण)

भारत में सर्पदंश से होने वाली 90% से अधिक मौतों हेतु चार मुख्य विषैली प्रजातियां उत्तरदायी हैं, जिन्हें ‘बिग फोर’ (Big Four Venomous Snakes) कहा जाता है। ये चारों प्रजातियां झारखंड के विभिन्न जिलों में पाई जाती हैं:

  • 1. स्पेक्टैकल्ड कोबरा / गेहूंअन (Spectacled Cobra – Naja naja):
    • कुल व वर्गीकरण: Elapidae परिवार।
    • भौतिक लक्षण: लंबाई 4 से 6 फीट। खतरा महसूस होने पर यह अपनी पसलियों (Cervical Ribs) को फैलाकर चौड़ा फन (Hood) बनाता है। फन के पीछे दो गोल चश्मे जैसी संरचना (Spectacle mark) होती है। (नोट: संताल परगना में ‘मोनोकेल्ड कोबरा’ – Naja kaouthia भी पाया जाता है, जिसके फन पर केवल एक गोल O-मार्क होता है)।
    • विष का प्रकार व प्रभाव: न्यूरोटॉक्सिक एवं कार्डियोटॉक्सिक विष (Post-synaptic Neurotoxin)। यह तंत्रिका तंत्र को ब्लॉक करता है, जिससे पलकें झुकने लगती हैं (Ptosis), सांस लेने में कठिनाई होती है और श्वसन तंत्र विफल (Respiratory Paralysis) हो जाता है।
    • आवास: चूहे के बिल, पुराने मकान, धान के खेत व जंगल।
  • 2. कॉमन करैत / करैत (Common Krait – Bungarus caeruleus):
    • कुल व वर्गीकरण: Elapidae परिवार।
    • भौतिक लक्षण: लंबाई 3 से 5 फीट। चमकदार गहरे काले/नीले रंग का शरीर, जिस पर गर्दन के बाद से पूंछ तक पतली सफेद दोहरी धारियां (Crossbands) होती हैं। रीढ़ की हड्डी के शल्क (Hexagonal Vertebral Scales) बड़े व षट्कोणीय होते हैं।
    • विष का प्रकार व प्रभाव: अत्यंत घातक प्री-सिनेप्टिक न्यूरोटॉक्सिन (Alpha & Beta Bungarotoxin)। यह भारत का सबसे विषैला धरातलीय सांप है। इसका विष कोबरा से 4 से 5 गुना अधिक विषैला होता है।
    • व्यवहार: यह पूर्णतः निशाचर (Nocturnal) होता है। यह दिन में शांत रहता है परंतु रात में भोजन की तलाश में कच्ची झोपड़ियों में जमीन पर सो रहे लोगों के बिछावन पर आ जाता है। इसका काटना इतना सूक्ष्म और दर्दहीन होता है कि व्यक्ति को नींद में पता ही नहीं चलता और सुबह पेट दर्द व सांस रुकने से मृत्यु हो जाती है।
  • 3. रसेल्स वाइपर / चंद्रबोड़ा / सियार चंदा (Russell’s Viper – Daboia russelii):
    • कुल व वर्गीकरण: Viperidae परिवार।
    • भौतिक लक्षण: भारी-भरकम, मोटा शरीर। सिर चौड़ा व त्रिकोणात्मक। शरीर की त्वचा पर भूरे-लाल या बदामी रंग के तीन कतारों में फैले अंडाकार छल्ले (Chain-like brown oval spots) होते हैं जो माला जैसे दिखते हैं।
    • विष का प्रकार व प्रभाव: हीमोटॉक्सिक, साइटोटॉक्सिक एवं मायोटॉक्सिक विष (Hemotoxic Venom)। यह रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया को नष्ट करता है (Coagulopathy), जिससे मसूड़ों, उल्टी, पेशाब तथा आंतरिक अंगों से खून बहने लगता है। डसे गए स्थान पर भयानक सूजन, दर्द और ऊतकों का सड़ना (Tissue Necrosis) शुरू हो जाता है।
    • व्यवहार: यह बहुत क्रोधी स्वभाव का होता है। खतरा महसूस होने पर गोल कुंडली बनाकर कुकर की सीटी जैसी अत्यंत तेज फुंकार (Loud Hissing Sound) मारता है और बिजली की गति से हमला करता है।
  • 4. सॉ-स्केल्ड वाइपर / फुरसा (Saw-Scaled Viper – Echis carinatus):
    • कुल व वर्गीकरण: Viperidae परिवार।
    • भौतिक लक्षण: आकार में छोटा (1 से 2 फीट)। शरीर के शल्क खुरदरे व आरीदार (Keeled Scales) होते हैं। खतरा होने पर यह अपने शरीर को अंग्रेजी के ‘S’ आकार में मोड़कर शल्कों को आपस में रगड़ता है, जिससे आरी चलने जैसी ‘सराहट’ (Sizzling Sound) उत्पन्न होती है।
    • विष का प्रकार: हीमोटॉक्सिक विष।
  • 5. अन्य विषैली प्रजातियां (Banded Krait & Pit Viper):
    • बैंडेड करैत / अहिराज (Bungarus fasciatus): काले और चमकीले पीले रंग के चौड़े पट्टे। इसका शरीर त्रिकोणीय (Triangular cross-section) होता है। यह अत्यधिक विषैला होने के बावजूद शर्मीला होता है और मुख्य रूप से अन्य सांपों का शिकार करता है।
    • बैम्बू पिट वाइपर / हरा सांप (Craspedocephalus gramineus): हरे रंग का वाइपर जो पारसनाथ, नेतरहाट व दलमा के वनों में पेड़ों पर पाया जाता है। आंख व नाक के बीच ऊष्मा-संवेदी ‘लोरियल पिट’ (Loreal Pit) अंग होता है।

4. Exhaustive Guide to Common Non-Venomous Snakes of Jharkhand (विषहीन सर्पों की विस्तृत निर्देशिका)

झारखंड में पाई जाने वाली प्रमुख विषहीन प्रजातियां जो मानव आबादी के आसपास अक्सर दिखाई देती हैं और बिना किसी कारण मार दी जाती हैं:

  • 1. इंडियन रैट स्नेक / धामन (Indian Rat Snake – Ptyas mucosa):
    • लक्षण: 6 से 8 फीट लंबा, सुडौल, जैतून-भूरा या पीला-भूरा रंग। होंठों पर काली लकीरें (Black lip margins) होती हैं। यह 20 किमी/घंटा की गति से दौड़ सकता है और पेड़ों पर भी चढ़ सकता है।
    • पारिस्थितिक महत्व: चूहों का सबसे बड़ा शिकारी। इसमें कोई विष नहीं होता। खतरा होने पर यह गुर्राने की आवाज निकालता है, जिससे लोग इसे गलती से कोबरा समझ लेते हैं।
  • 2. चेकर्ड कीलबैक / पानी सांप / डुंडू (Checkered Keelback – Fowlea piscator):
    • लक्षण: जैतून-हरे रंग के शरीर पर शतरंज के बोर्ड जैसे काले चौखाने धब्बे। आंखों के नीचे दो काली रेखाएं।
    • आवास: डोभा, तालाब, नदियां व धान के खेत। पूरी तरह विषहीन।
  • 3. बफ स्ट्राइप्ड कीलबैक / हरा डुंडू (Buff Striped Keelback – Amphiesma stolatum):
    • लक्षण: शरीर पर लंबाई में दो चमकीली पीली/क्रीम धारियां। अत्यंत शांत स्वभाव का विषहीन सांप जो कभी नहीं काटता।
  • 4. इंडियन वुल्फ स्नेक / भेड़िया सांप (Indian Wolf Snake – Lycodon aulicus):
    • लक्षण: छोटा (1.5 से 2 फीट), भूरा-काला रंग जिस पर सफेद/पीले रंग की पट्टियां होती हैं।
    • भ्रम व खतरा: यह घरों की दीवारों व छतों पर छिपकलियों का शिकार करता है। इसकी रंगत ‘कॉमन करैत’ से मिलती-जुलती होने के कारण ग्रामीण इसे करैत मानकर मार डालते हैं, जबकि इसके पीठ के शल्क गोल होते हैं और इसमें कोई विष नहीं होता।
  • 5. कॉमन कैट स्नेक / बिल्ली सांप (Common Cat Snake – Boiga trigonata):
    • लक्षण: सिर पर Y-आकार का निशान और बिल्ली जैसी लंबवत पुतली। यह हल्का विषैला (Rear-fanged) होता है, परंतु इसका विष मनुष्यों पर असर नहीं करता।
  • 6. इंडियन रॉक पायथन / अजगर (Indian Rock Python – Python molurus):
    • लक्षण: 10 से 15 फीट लंबा विशालकाय शरीर, जिस पर भूरे व पीले धब्बे होते हैं। यह शिकार को जकड़कर (Constriction) सांस रोककर मारता है।
    • संरक्षण स्थिति: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-I (Schedule I) के तहत संरक्षित। इसे मारना संज्ञेय अपराध है।

5. Snakebite Epidemiology & ASV Protocol in Jharkhand (सर्पदंश आंकड़े व एएसवी प्रोटोकॉल)

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के आधिकारिक आंकड़ों अनुसार राज्य में सर्पदंश एक गंभीर मानसूनी आपदा एवं लोक स्वास्थ्य चुनौती है:

  • सर्पदंश के आंकड़े (2022 से 2026 तक):
    • वर्ष 2022: 392 मामले दर्ज।
    • वर्ष 2023: 1,647 मामले (15 मौतें)।
    • वर्ष 2024: 2,760 मामले (22 मौतें)।
    • वर्ष 2025: 4,078 मामले (26 मौतें)।
    • वर्ष 2026 (अप्रैल तक): 561 से अधिक मामले दर्ज।
    • कुल योग: वर्ष 2022 से 2026 के मध्य राज्य में 9,438 से अधिक सर्पदंश के मामले दर्ज किए गए हैं।
  • अत्यधिक प्रभावित जिले: पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, रांची, हजारीबाग, धनबाद, गिरिडीह, लातेहार व संताल परगना के ग्रामीण क्षेत्र। मानसून के महीनों (जुलाई से अक्टूबर) में 80% से अधिक मामले सामने आते हैं।
  • राष्ट्रीय सर्पदंश रोकथाम योजना (NAP-SE): राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) द्वारा संचालित इस योजना का लक्ष्य 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों व अपंगता में 50% की कमी लाना है।
  • एण्टी-स्नेक वेनम (Polyvalent ASV) की कार्यप्रणाली:
    • भारत में निर्मित पॉलीवेलेंट एएसवी (Polyvalent ASV) को घोड़ों के रक्त प्लाज्मा से निर्मित किया जाता है, जिन्हें ‘बिग फोर’ (नाग, करैत, रसेल्स वाइपर, फुरसा) के निष्क्रिय विष से प्रतिरक्षित किया जाता है।
    • प्रशासनिक खुराक: लक्षण दिखाई देने पर शुरुआती 10 शीशी (Vials) ASV को 200 ml नॉर्मल सेलाइन में मिलाकर 1 घंटे के भीतर आईवी (Intravenous) ड्रिप के माध्यम से दिया जाता है।
    • उपलब्धता: झारखंड के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), सदर अस्पतालों तथा रिम्स रांची (RIMS), एमजीएम जमशेदपुर व एसएनएमएमसीएच धनबाद में ASV पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध है।

6. Emergency First-Aid: DO’s & DON’Ts (सर्पदंश प्राथमिक उपचार: क्या करें व क्या न करें)

  • क्या न करें (Dangerous Myths & DON’Ts):
    • कसकर बांधना (Tourniquet): डसे हुए स्थान के ऊपर रस्सी, कपड़ा या तार कसकर न बांधें। इससे रक्त प्रवाह रुक जाता है और उस अंग में सड़ांध (Gangrene) पैदा हो जाती है, जिससे अंततः पैर/हाथ काटना पड़ता है।
    • चीरा लगाना व चूसना: घाव पर ब्लेड से कट न लगाएं और न ही मुंह से जहर चूसें। इससे संक्रमण और अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा होता है।
    • बर्फ या बिजली का झटका: घाव पर बर्फ न रखें और न ही कोई जड़ी-बूटी/रसायन लगाएं।
    • अंधविश्वास व झाड़-फूंक: ओझा, गुणी या तांत्रिक के पास जाकर मूल्यवान ‘गोल्डन आवर’ (Golden Hour) बर्बाद न करें।
  • क्या करें (National ‘RIGHT’ Protocol):
    • R (Reassure): मरीज को शांत रखें। घबराहट से एड्रेनालाईन हार्मोन स्रावित होता है, जिससे दिल की धड़कन तेज होती है और जहर पूरे शरीर में तेजी से फैलता है।
    • I (Immobilize): प्रभावित अंग को पूरी तरह स्थिर रखें (जैसे टूटी हड्डी पर खपच्ची बांधी जाती है)। अंगूठी, कड़ा, घड़ी व जूते तुरंत उतार दें।
    • GH (Get to Hospital): मरीज को तुरंत निकटतम सरकारी अस्पताल ले जाएं। मरीज को पैदल न चलाएं।
    • T (Tell Symptoms): डॉक्टर को मरीज के लक्षण बताएं (जैसे पलकें गिरना, निगलने में तकलीफ, मसूड़ों से खून आना)।

7. Legal Framework & Wildlife Conservation Laws (वन्यजीव कानून एवं कानूनी प्रावधान)

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (WPA 1972): भारत में सभी सर्पों को कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
    • अनुसूची I (Schedule I): इंडियन रॉक पायथन (अजगर)। इसे मारना या नुकसान पहुंचाना 3 से 7 वर्ष के कारावास तथा भारी जुर्माने का संज्ञेय अपराध है।
    • अनुसूची II (Schedule II): कोबरा, करैत, रसेल्स वाइपर तथा धामन। इन्हें मारना, पकड़ना या मदारी द्वारा प्रदर्शनी हेतु रखना गैर-कानूनी है।
  • सपेरों व सपेरा बस्तियों का पुनर्वास: सपेरों द्वारा सांपों के विष-दंत निकालना व उनका प्रदर्शन करना कानूनी अपराध है।
  • वन विभाग हेल्पलाइन: घर या आबादी में सांप निकलने पर वन विभाग झारखंड के राज्य स्तरीय टोल-फ्री नंबर 1800-88-92633 पर सूचित कर प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यूअर (Snake Rescuer) की मदद लेनी चाहिए।

8. Master Comparison Table: Comprehensive Analysis of Jharkhand’s Snakes

झारखंड की प्रमुख सर्प प्रजातियों, उनके विष के प्रकार, शारीरिक लक्षणों व संरक्षण स्थिति का संपूर्ण तुलनात्मक चार्ट:

सांप का नाम (Species Name) कुल (Family) विष की प्रकृति (Venom Nature) मुख्य भौतिक पहचान (Identification) कानूनी दर्जा (WPA 1972 Status)
गेहूंअन / नाग (Naja naja) Elapidae न्यूरोटॉक्सिक / कार्डियोटॉक्सिक फन पर चश्मे जैसा निशान, फन फैलाना Schedule II Protected
कॉमन करैत (Bungarus caeruleus) Elapidae अत्यंत घातक प्री-सिनेप्टिक न्यूरोटॉक्सिन चमकदार काला शरीर, पतली सफेद दोहरी धारियां Schedule II Protected
चंद्रबोड़ा / सियार चंदा (Daboia russelii) Viperidae हीमोटॉक्सिक एवं साइटोटॉक्सिक मोटा शरीर, भूरे-लाल छल्ले, तेज फुंकार Schedule II Protected
धामन (Ptyas mucosa) Colubridae पूर्णतः विषहीन (Non-Venomous) लंबा, जैतून-भूरा रंग, होंठों पर काली रेखाएं Schedule II Protected
पानी सांप / डुंडू (Fowlea piscator) Natricidae लोगों हेतु पूर्णतः विषहीन शतरंज जैसे चौखाने धब्बे, जलीय आवास Schedule II Protected
भेड़िया सांप (Lycodon aulicus) Colubridae पूर्णतः विषहीन (Non-Venomous) छोटा आकार, भूरे शरीर पर सफेद पट्टियां Protected Species
अजगर (Python molurus) Pythonidae विषहीन (Constrictor) विशालकाय शरीर, बड़े भूरे धब्बे Schedule I (Highest Protection)

9. Practice MCQs & Mains Model Questions for JPSC / JSSC Exams

📝 Prelims Multiple Choice Questions (MCQs):

प्र.1. झारखंड में पाई जाने वाली सांपों की कुल प्रजातियों में से लगभग कितने प्रतिशत सांप पूरी तरह विषहीन (Non-Venomous) होते हैं?

(A) 50%     (B) 75%     (C) 85%     (D) 95% से अधिक

उत्तर: (D) 95% से अधिक (केवल 4-5 प्रजातियां ही विषैली होती हैं)।

प्र.2. ‘कॉमन करैत’ (Common Krait – Bungarus caeruleus) के विष का मुख्य प्रकार एवं प्रभाव क्या है?

(A) हीमोटॉक्सिक (रक्तस्रावी)     (B) न्यूरोटॉक्सिक (तंत्रिका तंत्र नाशक)     (C) साइटोटॉक्सिक     (D) कोई विष नहीं

उत्तर: (B) न्यूरोटॉक्सिक (यह श्वसन तंत्र को पैरालाइज कर देता है)।

प्र.3. राष्ट्रीय सर्पदंश रोकथाम योजना (NAP-SE) का मुख्य लक्ष्य किस वर्ष तक सर्पदंश मौतों में 50% की कमी लाना है?

(A) 2028     (B) 2030     (C) 2035     (D) 2040

उत्तर: (B) वर्ष 2030 तक (NCDC द्वारा संचालित लक्ष्य)।

प्र.4. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत ‘इंडियन रॉक पायथन’ (अजगर) को किस अनुसूची में रखा गया है?

(A) अनुसूची I     (B) अनुसूची II     (C) अनुसूची III     (D) अनुसूची IV

उत्तर: (A) अनुसूची I (Schedule I – उच्चतम कानूनी संरक्षण)।

✍️ JPSC Mains Paper I & Paper II Model Question (12 Marks):

प्रश्न: “झारखंड के ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में सर्पदंश एक प्रमुख मौसमी स्वास्थ्य आपदा है। सर्पों की पारिस्थितिक उपयोगिता को रेखांकित करते हुए, सर्पदंश नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय ‘RIGHT’ प्राथमिक उपचार प्रोटोकॉल, एएसवी (ASV) प्रबंधन तथा जन-जागरूकता रणनीतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।” (400-500 शब्द)

⚡ Quick Bites: 30 Key Revision Facts on Snakes & Health Management in Jharkhand

  1. विषहीन सर्पों का प्रतिशत: झारखंड में पाई जाने वाली 95% से अधिक सांप प्रजातियां पूरी तरह विषहीन हैं।
  2. बिग फोर विषैले सांप: गेहूंअन (Cobra), करैत (Krait), चंद्रबोड़ा (Russell’s Viper), फुरसा (Saw-scaled Viper)।
  3. न्यूरोटॉक्सिक विष वाले सांप: कोबरा (Cobra) एवं कॉमन करैत (Krait)।
  4. हीमोटॉक्सिक विष वाले सांप: रसेल्स वाइपर (Russell’s Viper) एवं बैम्बू पिट वाइपर।
  5. भारत का सबसे विषैला सांप: कॉमन करैत (Bungarus caeruleus – रात में सक्रिय)।
  6. कुकर जैसी तेज फुंकार: रसेल्स वाइपर (Daboia russelii)।
  7. किसानों का सबसे बड़ा मित्र: धामन (Indian Rat Snake – Ptyas mucosa)।
  8. पानी में पाया जाने वाला विषहीन सांप: चेकर्ड कीलबैक (डुंडू – Fowlea piscator)।
  9. अनुसूची-I में संरक्षित: इंडियन रॉक पायथन (अजगर – Schedule I Protected)।
  10. प्राथमिक उपचार प्रोटोकॉल: राष्ट्रीय ‘RIGHT’ (Reassure, Immobilize, Get to Hospital, Tell Symptoms)।
  11. सर्पदंश की रामबाण दवा: पॉलीवुडेंट एण्टी-स्नेक वेनम (Polyvalent ASV)।
  12. एएसवी की प्राथमिक खुराक: 10 शीशी (Vials) 200 ml नॉर्मल सेलाइन में आईवी ड्रिप द्वारा।
  13. जानलेवा गलतियां: कसकर बांधना (Tourniquet), चीरा लगाना, जहर चूसना, ओझा के पास जाना।
  14. राष्ट्रीय सर्पदंश नियंत्रण लक्ष्य: NAP-SE के तहत 2030 तक सर्पदंश मौतों में 50% कमी।
  15. झारखंड में दर्ज मामले (2022-2026): 9,438 से अधिक सर्पदंश के मामले दर्ज।
  16. अत्यधिक प्रभावित जिले: पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, रांची, हजारीबाग, धनबाद, गिरिडीह।
  17. भगवान बिरसा जैविक उद्यान: ओरमांझी (रांची) स्थित सर्पघर (Reptile House)।
  18. हरा विषैला सांप: बैम्बू पिट वाइपर (नेतरहाट व पारसनाथ पहाड़ियों में)।
  19. भेड़िया सांप (Wolf Snake): विषहीन सांप जो करैत जैसा दिखता है।
  20. बिल्ली सांप (Cat Snake): हल्का विषैला (Rear-fanged) परंतु मनुष्यों हेतु सुरक्षित।
  21. सांपों के कान: बाहरी कान अनुपस्थित, धरातलीय कंपन (Vibrations) महसूस करते हैं।
  22. जैकोबसन अंग (Jacobson’s Organ): जीभ द्वारा हवा में गंध के कण सूंघने का अंग।
  23. वन विभाग टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-88-92633 (मानव-वन्यजीव संघर्ष व सर्प रेस्क्यू)।
  24. मोनोकेल्ड कोबरा: संताल परगना में पाया जाने वाला फन पर एक O-मार्क वाला कोबरा।
  25. अहिराज (Banded Krait): पीले व काले पट्टों वाला विषैला सांप जो अन्य सांपों को खाता है।
  26. 20-मिनट होल ब्लड क्लॉट टेस्ट (20-WBCT): वाइपर विष जांच हेतु अस्पतालों में किया जाने वाला परीक्षण।
  27. गैंग्रीन का खतरा: कसकर पट्टी बांधने से रक्त न पहुंचने पर अंग का काला पड़ना व सड़ना।
  28. गोल्डन आवर: सर्पदंश के बाद पहला 1 घंटा, जिसमें अस्पताल पहुंचने पर जान बचने की संभावना 99% होती है।
  29. सपेरा प्रदर्शनी: वन्यजीव कानून 1972 के तहत सपेरों द्वारा सांप का प्रदर्शन अवैध।
  30. मुफ्त एएसवी सेवा: झारखंड के सभी सीएचसी, पीएचसी व जिला अस्पतालों में ASV नि:शुल्क।

❓ Frequently Asked Questions (FAQ) for JPSC/JSSC Aspirants

Q1: Why are over 95% of snake species in Jharkhand considered harmless to humans?

उत्तर: क्योंकि राज्य में पाई जाने वाली 35 से अधिक प्रजातियों में से केवल 4-5 प्रजातियां ही विषैली हैं। शेष 95% प्रजातियां पूरी तरह विषहीन (Non-Venomous) होती हैं और खेतों में चूहों को खाकर फसलों की रक्षा करती हैं।

Q2: Which venomous snakes are classified under the ‘Big Four’ in Jharkhand?

उत्तर: स्पेक्टैकल्ड कोबरा (गेहूंअन), कॉमन करैत (करैत), रसेल्स वाइपर (चंद्रबोड़ा) तथा सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसा)।

Q3: How does Polyvalent Anti-Snake Venom (ASV) work against snakebite in Jharkhand?

उत्तर: पॉलीवुडेंट एएसवी भारत के चारों प्रमुख विषैले सांपों (‘बिग फोर’) के विष को बेअसर करता है। यह झारखंड के सभी सीएचसी व सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध है।

Q4: What is the official ‘RIGHT’ protocol for emergency snakebite first-aid?

उत्तर: R (Reassure – शांत रखें), I (Immobilize – अंग स्थिर रखें), GH (Get to Hospital – तुरंत अस्पताल ले जाएं), T (Tell Symptoms – डॉक्टर को लक्षण बताएं)।

Q5: Why is applying a tight tourniquet (रस्सी बांधना) forbidden during snakebite first-aid?

उत्तर: कसकर रस्सी बांधने से उस अंग में रक्त का संचार रुक जाता है, जिससे ऊतक सड़ने लगते हैं (Gangrene) और अंततः उस अंग को काटना पड़ सकता है।

Q6: Which snake species is protected under Schedule I of the Wildlife Protection Act 1972?

उत्तर: इंडियन रॉक पायथन (अजगर – Python molurus), जिसे मारना या नुकसान पहुंचाना संज्ञेय अपराध है।

Q7: What is the target set under the National Action Plan for Prevention and Control of Snakebite Envenomation (NAP-SE)?

उत्तर: एनसीडीसी (NCDC) द्वारा संचालित इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और अपंगता में 50% की कमी लाना है।

Q8: What is the Forest Department helpline number for snake rescue in Jharkhand?

उत्तर: झारखंड वन विभाग का राज्य स्तरीय टोल-फ्री नंबर 1800-88-92633 है।