Sangeet Natak Akademi Awards 2024–2025

Sangeet Natak Akademi Awards 2024–2025: Jharkhand Winners & Key Facts

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1. Introduction: Cultural Consciousness and National Recognition for Jharkhand

झारखंड राज्य की भौगोलिक सीमाओं के भीतर निहित सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक लोक-साधना केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि ये इस क्षेत्र के मूल निवासियों की ऐतिहासिक स्मृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के साथ उनके अनूठे सह-अस्तित्व के जीवंत दस्तावेज हैं। हाल ही में, भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय अलंकरण समारोह में वर्ष 2024 और 2025 के लिए देश के सर्वोच्च कला सम्मान Sangeet Natak Akademi Fellowship एवं Sangeet Natak Akademi Awards प्रदान किए गए हैं।

इस गरिमामयी अवसर पर अपने मुख्य संबोधन में महामहिम राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष बल दिया कि “भारतीय परंपरा के वाहक हमारे कलाकार देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं। हमारे देश की संस्कृति अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है, जहाँ खान-पान, वेषभूषा, नृत्य और संगीत सीधे तौर पर प्रकृति से प्रेरणा लेते हैं। चहकती चिड़ियों, कलकल बहते झरनों और वनों से ऊर्जा पाकर हमारे लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। विविधता और एकता का यह संगम हमारी कलाओं की सबसे बड़ी शक्ति है। परंतु आधुनिकता की अंधी दौड़ में आज हमारी कई प्राचीन लोक-कलाओं पर विलुप्त होने का संकट मंडरा रहा है, जिन्हें केवल दस्तावेजीकरण से नहीं बल्कि जीवंत गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से ही संरक्षित किया जा सकता है। संगीत नाटक अकादमी का Kala-Diksha Programme इसी दिशा में एक सराहनीय पहल है।

यह समसामयिक घटनाक्रम आगामी JPSC (Jharkhand Public Service Commission) की सिविल सेवा परीक्षा (प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के Art and Culture खंड) तथा JSSC (Jharkhand Staff Selection Commission) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक उच्च-उपज (High-Yield) और अनिवार्य रूप से अध्ययन करने योग्य विषय बन जाता है। इस विस्तृत अध्ययन आलेख में हम अकादमी के संस्थागत इतिहास, इसके राष्ट्रीय महत्व, झारखंड से सम्मानित विभूतियों की जीवन-साधना, उनकी कला-विधाओं के समाजशास्त्रीय आयामों और बहुविकल्पीय परीक्षा पैटर्न का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

2. Sangeet Natak Akademi: Institutional History, Formation, and Statutory Background

किसी भी सिविल सेवा प्रतियोगी के लिए कला एवं संस्कृति के Static GK खंड पर मजबूत पकड़ होना आवश्यक है। Sangeet Natak Akademi से जुड़े ऐतिहासिक और प्रशासनिक तथ्यों को निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत विस्तार से समझें:

  • Establishment Background: भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 1952 में एक प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कलाओं के विकास हेतु एक शीर्ष संस्था के गठन का निर्णय लिया गया। तदनुसार, संगीत नाटक अकादमी की स्थापना की गई और आधिकारिक तौर पर इसका उद्घाटन 28 जनवरी 1953 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा किया गया था।
  • First Leadership: इस प्रतिष्ठित संस्थान के प्रथम अध्यक्ष प्रख्यात शिक्षाविद, न्यायविद् और स्वतंत्रता सेनानी Dr. P. V. Rajamannar थे, जिन्होंने इसके प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • Current Administrative Framework: वर्तमान समय में यह अकादमी भारत सरकार के Ministry of Culture के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन (Autonomous Body) के रूप में कार्य करती है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर के अंतर्गत संगीत, नृत्य, नाटक (Theatre) और लोक/जनजातीय कलाओं के रूपों का संरक्षण, संवर्धन और दस्तावेजीकरण करना है।
  • Award Categories & Hierarchy:
    • Akademi Fellowship (Akademi Ratna): यह इस संस्था का सर्वोच्च और सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है, जो सीमित संख्या में असाधारण वरिष्ठ विभूतियों को उनकी आजीवन साधना के लिए प्रदान किया जाता है。
    • Sangeet Natak Akademi Award: यह देश के विभिन्न राज्यों के उन प्रतिष्ठित कलाकारों को दिया जाता है जिन्होंने अपने कला क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देकर राष्ट्रीय पहचान बनाई है。
    • Ustad Bismillah Khan Yuva Puraskar: यह पुरस्कार प्रदर्शन कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 40 वर्ष से कम आयु के युवा एवं प्रतिभावान कलाकारों को उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदान किया जाता है।

3. Comprehensive Awardees Matrix: Distinguished Winners from Jharkhand

Jharkhand Public Service Commission (JPSC) और Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) की परीक्षाओं में अक्सर सीधे नाम, जिला और कला विधा से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे दी गई सारणी का सूक्ष्म अध्ययन करें:

Artist Name (कलाकार का नाम) District / Region (जिला / क्षेत्र) Art Form / Sub-Field (कला विधा) Award & Year (पुरस्कार व वर्ष)
Butan Devi & Somwari Devi (Sisters) Bundu, Ranchi Nachni Folk Dance Tradition (नचनी नृत्य परंपरा) Sangeet Natak Akademi Award (2024)
Guru Sushant Kumar Mahapatra Seraikela-Kharsawan Seraikela Chhau Mask Making (छऊ मुखौटा शिल्प) Sangeet Natak Akademi Award (2025)
Kuna Samal Jharkhand (Seraikela Region) Chhau Dance Performance (छऊ नृत्य प्रदर्शन) Ustad Bismillah Khan Yuva Puraskar (2024)
Babita Hembram Chandankiyari, Bokaro Santali Folk Dance & Culture (संताली लोक नृत्य) Ustad Bismillah Khan Yuva Puraskar (2025)

4. In-Depth Academic & Sociological Analysis of Jharkhand’s Folk Art Forms

A. Nachni Dance Tradition and the Historic Contribution of Butan & Somwari Sisters

झारखंड के ग्रामीण और सांस्कृतिक ताने-बाने में ‘नचनी’ और ‘रसिक’ की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही एक विशिष्ट लोक नाट्य और नृत्य शैली है। इस पारंपरिक विधा में ‘नचनी’ (महिला नर्तकी) अपने सहयोगी पुरुष कलाकार ‘रसिक’ के साथ मिलकर पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे मांदर, ढोल और नगाड़े की थाप पर प्रदर्शन करती है। ऐतिहासिक रूप से यह नृत्य ग्रामीण मेलों, जात्रा उत्सवों, विवाह समारोहों और फसल कटाई के पर्वों पर सामाजिक उल्लास का माध्यम रहा है। परंतु, आधुनिकता के दौर, संरक्षण के अभाव और सामाजिक उपेक्षा के कारण यह समृद्ध परंपरा लगभग विलुप्ति के कगार पर पहुँच चुकी थी।

ऐसी विकट परिस्थितियों में बुंडू (रांची) क्षेत्र की दो सगी बहनों, बुटन देवी और सोमवारी देवी ने अपने जीवन की लंबी तपस्या, संघर्ष और निष्ठा के बल पर इस विधा को जीवित रखा। उन्होंने अपनी आने वाली पीढ़ियों को इस कला का प्रशिक्षण दिया। इन दोनों बहनों को वर्ष 2024 के लिए Sangeet Natak Akademi Award मिलना इस बात का प्रमाण है कि झारखंड की उपेक्षित और हाशिए की लोक-विधाओं को भी अब राष्ट्रीय फलक पर सर्वोच्च स्वीकृति मिल रही है। यह JPSC Mains परीक्षा के ‘Jharkhand Culture’ खंड में उत्तर लेखन के लिए एक उत्कृष्ट Case Study है।

B. Global Artisans of Seraikela Chhau & Mask Making: Guru Sushant Kumar Mahapatra

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त Seraikela Chhau Dance अपनी विशिष्ट शैली, भाव-भंगिमाओं (Chhau Chowk and Topka) तथा सुंदर मुखौटों के लिए पूरी दुनिया में अद्वितीय स्थान रखता है। UNESCO Intangible Cultural Heritage सूची में शामिल सरायकेला छऊ नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता इसके भावपूर्ण Mask हैं। चूंकि इस नृत्य शैली में चेहरे की मांसपेशियों के सूक्ष्म भावों का प्रदर्शन नहीं किया जाता, इसलिए कथाओं के मर्म को अभिव्यक्त करने की पूरी जिम्मेदारी मुखौटे पर होती है।

  • Traditional Heritage & Lineage: गुरु सुशांत कुमार महापात्र प्रसिद्ध छऊ मुखौटा निर्माता प्रसन्न कुमार महापात्र के प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं। उन्होंने मात्र आठ वर्ष की आयु से अपने घर पर ही इस अत्यंत जटिल और पारंपरिक Mask Making Craft की तालीम लेनी शुरू कर दी थी।
  • Exhibitions on Global Stages: उन्होंने न केवल भारत के विभिन्न महानगरों में बल्कि New York (USA), Berlin (Germany), Paris (France), और Vienna (Austria) जैसे दुनिया के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्रों पर सरायकेला के छऊ मुखौटों की कला का प्रदर्शन किया है।
  • Historic Milestones: वर्ष 1996 के ऐतिहासिक Seoul Olympics (South Korea) के दौरान Sangeet Natak Akademi के विशेष अनुरोध पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और श्रीगणेश के विशेष पारंपरिक मुखौटे तैयार कर भेजे थे, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी सराहना मिली थी। उनकी यह कला अब उनकी तीसरी पीढ़ी (पुत्र सुमित महापात्र) के हाथों में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रही है।

C. Promotion of Young Talents: Kuna Samal and Babita Hembram

भारतीय संगीत नाटक अकादमी द्वारा युवा कलाकारों (40 वर्ष से कम आयु) को प्रोत्साहित करने के लिए स्थापित Ustad Bismillah Khan Yuva Puraskar झारखंड के उभरते कलाकारों के लिए एक बड़ा संबल है। वर्ष 2024 के लिए Chhau Dance के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु Kuna Samal तथा वर्ष 2025 के लिए Santali Folk Dance व संस्कृति के संरक्षण हेतु Chandankiyari (Bokaro) की Babita Hembram का चयन किया गया है। यह पुरस्कार इस बात की पुष्टि करता है कि झारखंड की युवा पीढ़ी अपनी पारंपरिक जड़ों के प्रति पूरी तरह सजग है और लोक कलाओं का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

⚡ Quick Bite (Rapid Revision Points for Competitive Exams):

  • When was the Sangeet Natak Akademi established? ➔ 1952 (Formal Inauguration on 28 January 1953)
  • Who received the Sangeet Natak Akademi Award for 2024 from Jharkhand? ➔ Butan Devi & Somwari Devi (Nachni Dance, Bundu, Ranchi)
  • Who received the Sangeet Natak Akademi Award for 2025? ➔ Guru Sushant Kumar Mahapatra (Seraikela Chhau Mask Craft)
  • Under which category was Babita Hembram honored? ➔ Ustad Bismillah Khan Yuva Puraskar (2025 – Santali Dance)
  • Which global organization recognizes Seraikela Chhau Dance? ➔ UNESCO Intangible Cultural Heritage List
  • Who conferred these prestigious awards? ➔ Hon’ble President of India, Smt. Droupadi Murmu

5. Exam-Oriented Multiple Choice & Descriptive FAQs for Aspirants

Q1. Under which central ministry does the Sangeet Natak Akademi operate?
Ans: यह राष्ट्रीय पुरस्कार भारत सरकार के Ministry of Culture के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रदान किए जाते हैं。

Q2. How does Seraikela Chhau differ from other Chhau styles like Mayurbhanj or Purulia?
Ans: Seraikela Chhau की सबसे मुख्य विशेषता इसका अनिवार्य रूप से ‘Mask’ (मुखौटा) पहनकर प्रदर्शन किया जाना है। इसके विपरीत, Mayurbhanj Chhau में मुखौटे का प्रयोग नहीं किया जाता है, जबकि Purulia Chhau में भी मुखौटे पहने जाते हैं किंतु उनके आकार और निर्माण शैली में स्थानीय भिन्नता होती है।

Q3. On which date were the Sangeet Natak Akademi Fellowships and Awards for 2024 and 2025 presented by President Droupadi Murmu?
Ans: यह भव्य अलंकरण समारोह 13 August 2026 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित किया गया था。

Q4. What initiatives are being taken by the Government of Jharkhand to protect folk arts at the state level?
Ans: झारखंड सरकार द्वारा Tribal Research Institute (TRI), विभिन्न सांस्कृतिक अकादमियों और लोक कला महोत्सवों के माध्यम से पारंपरिक कलाकारों को वित्तीय सहायता, पेंशन योजनाएं और मंच प्रदान किए जा रहे हैं ताकि गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत रखा जा सके।


The Source Line: For the official press release, comprehensive awardees lists, and authentic announcements regarding national cultural recognitions, refer to the Ministry of Culture & PIB Release ID: 2298996.

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